First CORONA Lock-Down: How I Spent 21Days

First CORONA Lock-Down: How  I Spent 21Days

मैंने २१ दिन कैसे बिताये  : कोरोना लॉक डाउन

21 दिन के लॉक डाउन की अवधि खत्म हो गई I  मजा आ गया और  यह 21 दिन  कैसे  बीत  गए  कोई पता ना चला I शुरू में तो मुझे लगा था कि ना, बहुत ही मुश्किल बात हो जाएगी २१ दिन घर में रह कर काटना लेकिन फिर बाद में पूरा analyze किया खुद को तो  लगा कि ये  21 दिन मुझे  मेरी   लाइफ में एक सुनहरे  अवसर  के  रूप  मे  मिले   है और फिर  Finally  सोचा  कि इस दौरान यहां-वहां ना भटक कर खुद पर ही फोकस किया जाए और कुछ नया काम किया जाए यार…….. बहुत हो गया अब… ।

ऐसे तो आम  Daily Routine मे  कभी भी अपने ऊपर फोकस नहीं कर पाते लेकिन अब जब lock-down  की वजह से घर में रहना ही पड़ेगा तो क्यों ना खुद पर फोकस करके कुछ नया काम किया जाए । मेरे मन में बस यही बात शुरू के चार-पांच दिन जोर पकड़ती गई और मैंने कोशिश की, कि कुछ निश्चित  टाइम टेबल और शेड्यूल बनाया जाए ताकि प्रतिदिन किये जाने वाले कार्यो  को  ठीक से संचालित किया जा सके I  फिर  finally मैंने यह तय किया कि  सुबह अपने टाइम टेबल के हिसाब से 5:30 बजे उठा जाए और बाकी अपनी जो रूटीन एक्टिविटीज होती हैं उन्हें time-bound manner में  पूरा करके बाकी का काम आरंभ किया जाए ।

दोस्तों shuru में अपने आप से बहुत कशमकश करनी  पड़ी  लेकिन फिर  रास्ता मिल ही गया । जैसा मैंने अपने पिछले आर्टिकल में लिखा था कि  22 तारीख को हम  कुछ   दोस्तों ने मिलकर के यह योजना बनाई थी कि कोरोना वायरस को निष्क्रिय करने के लिए और अपने आसपास के वातावरण को ज्यादा सशक्त  बनाने के लिए सभी लोग अपने अपने घरों में हवन करें और अपने आसपास के वातावरण में एक सुरक्षा कवच तैयार करें । लेकिन जैसे मैंने लिखा है कि इस  मिशन  मे  हम पूर्णता कामयाब नहीं हुए केबल 5 लोग  ही  इस

प्रक्रिया  को  पूरा  कर पाए बाकी लोग विभिन्न कारणों से इस कार्य को अंजाम नहीं दे पाए । हां,  मे  यहाँ  यह भी कहना चाहता हूं कि  हम भारतीय लोग किसी भी बात को जिसमें सामाजिक भलाई छुपी होती है, उसको इतने आराम से  नहीं  मानते  और  इस  बात  के प्रूफ  के  तौर  पर  आपने पूरे देश की तस्वीर देखी होगी कि लोग किस प्रकार से Lock-Down का   उल्लंघन करके बाहर निकल कर के सड़कों पर यहां से वहां भाग रहे थे लेकिन हमारे आदरणीय  प्रधान  मंत्री  जी हम  सभी  कि  मानसिकता  को  अच्छी  तरह  समझते  है   और वह जानते हैं कि किस प्रकार से ऐसी मानसिकता वाले लोगों को हैंडल करना है और उन्होंने  इस  दौरान   बखूबी किया भी ।

लॉक डाउन की मेरी कहानी

Lock-Down की मेरी कहानी बड़ी अलग सी है और मैं समझता हूं इस कहानी में आपको आनंद आएगा…. तो आइये  ज्यादा  वक़त  बर्बाद  न  करते  हुए   मुद्दे की बात करते हैं । लॉक डाउन के शुरूआती दौर में मुझे भी यही लगा कि  क्या करूं, क्या ना करूं और 21 दिन  का  लम्बा  अरसा  कैसे  बिताया  जाए  और   इस कशमकश में 5 6  दिनों  का  समय  लगा  और  तब  यह  decide हुआ  कि   मुझे  क्या  करना  चाहिए i .

शुरूआती दौर की योजनाए तो बार बार असफल होती रही लेकिन फिर एक दिन अचानक ही मन में आया कि ऐसा मौका ना पहले मिला था और  शायद  कभी  आगे  भी  नहीं  मिलेगा  इस  लिए   पूरी कमिटमेंट के साथ खुद पर काम किया जाए, खुद को तराशा जाए और कोई नया काम करके आने वाले जीवन का एक अभिन्न अंग बना लिया जाए । दोस्तों मैंने क्या किया कि एक Activity  शड्यूल बनाया अपना डेली Routines और  फिर  यह  तय किया  कि  कैसे कब-कब क्या-क्या काम करना है और कैसे  कमिटेड और self-motivated रहना है ।

सबसे पहले मैंने अपने अंदर की कमजोरियों  कि   सूची बनाई I सूची बनाकर के मैंने  कई  बार  सोचा और यह खुद से सवाल किए कि  क्या  मै  अपने इस शेड्यूल को adopt कर  पाउँगा  ?  तब  मुझे  अपने  अंदर   से एक बहुत ही और दृढ़ संकल्प वाला जवाब मिला कि   Yess , मुझे  यह  schedule   हर  हालत  मै पूरा  करना   होगा। अपने इस आंतरिक कमिटमेंट से मुझे  बहुत खुशी हुई और बहुत साहस मिला और  एक  अजीब  सा  एहसास  हुआ  कि  जब मैं अंदर से इतना स्ट्रांग हूं , तो क्यों ना  इस दिशा में आगे बढ़ा जाए I

वैसे तो मैं पहले से  ही  Early-Riser हूँ   और 5:30 बजे उठ जाता  हु  लेकिन  बस  ऐसे  ही

बिना किसी  वजह से फिर अलार्म बंद करके जैसे आम बात होती है, सो  जाता  था   और इस चक्कर में कई  बार 6:30 बज जाते थे लेकिन इस बार मैंने खुद से कमिटमेंट किया कि नहीं, मुझे 5:30 जैसे अलार्म बजेगा उसके साथ उठना  ही है चाहे जो भी हो जाए चाहे मेरा मन करे या ना करे और मैंने सुबह 5:30 बजे उठना स्टार्ट किया और उसके बाद जो काम मे करता हु वे है, जैसे मैं करीब 4 किलोमीटर मीटर से 6 किलोमीटर तक सुबह की सैर करता हूँ I   उसके बाद फिर Exercise करता था लेकिन फिर बीच में यह होता था कि जैसे मोबाइल  साथ में ले लिया तो व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेज या दूसरे कोई भी  सोशल मीडिया के जो messages  या  news वगेरा  होती   उस पर बिजी हो जाया करता था और जो एक्सरसाइज, प्राणायाम बगैरा है इसको करते-करते कई बार 11 बज  जाते  थे और फिर बहुत फ्रस्ट्रेशन होती थी और कोई भी काम टाइम पर नहीं होता था तो मैंने सबसे पहले यह तय किया कि मैं तय  schedule के  हिसाब  से चलूंगा और 8:00 बजे से पहले पहले  अपने सारे काम  निपटा  करके  8:00 बजे पूरा फ्री हो जाऊंगा I   इस प्रकार से सब  तय किया और बिना  कोई  देर  किये  अपना  SCHEDULE इम्प्लीमेंट  करने  का  प्रयास  करना  शुरू  किया I यह बात स्वाभाविक थी कि शुरू  के   2 दिन बहुत मुश्किल हुई लेकिन फिर मैंने  SCHEDULE को  FOLLOW   करने  का  प्रयास आरम्भ  किया  और  यह  तय किया  कि मैं 8:00 बजे से पहले मोबाइल को हाथ नहीं लगाऊंगा और कोई

फेसबुक या व्हाट्सएप मैसेज नहीं देखूंगा । उसके बाद मैंने अपने  DAY-ACTIVITIES मे एक  NEW CONCEPT  शामिल  किया  सूर्य नमस्कार सीखने  की  मुझे  पिछले करीब  एक  साल  से  बहुत तीव्र  इच्छा  थी I आप  सभी  जानते  होंगे  की  एक  बार सूर्य नमस्कार के पूरे चक्र (राउंड)  मे   विभिन्न प्रकार के 12 योगासन किये जाते हैI वास्तव  मे  यह   इच्छा  मेरे  मन   मे  तब  से  बहुत  तीव्र  हो  गयी  थी  जब  से  मैंने मॉर्निंग वॉक पर  जाते  हुए  उस  रास्ते  पर  2 FOREIGNERS को  हर  रोज  सुबह  सूर्य   नमस्कार करते  देखा  था  और   पिछले  1 साल से मेरे मन में था कि मैं भी सूर्य नमस्कार किया करूंगा और इसको सीख लूंगा लेकिन अब  तक  मैं  इसे सीख  नहीं  पाया  था  और अब मेरे पास एक मौका था और मैंने सूर्य नमस्कार को आरंभ किया I  उसके बाद  मे आपको बताना चाहता हु की एक दूसरी बात भी मे बहुत दिनों से सोचा करता था की योगासन सीखूंगा और लोगो को भी सिखाया करूँगा लेकिन ऐसा कभी हो नहीं पा रहा था I  इस लिए मैंने यह भी सोच  लिया कि अब  क्यों न यह इच्छा भी पूरी कर ली जाए।

  1. सूर्य नमस्कार  
  2. सूर्य नमस्कार के बाद मैंने 10 प्रकार के आसनो का चयन किया कि कौन-कौन से आसन मुझे करने हैं I जिन  मुख्य आसनो को मैंने अपने दैनिक अभ्यास के लिए चुना और मे पिछले लॉक-डाउन के दौरान 15 दिनों तक अभ्यास किया ,  वे है     १) जानू-शिरासन  २)  गोमुखासन  ३) धंनुर्रासन   ४)  भुजंगासन  ५) नौकासन  ६) सर्वांगासन  ७)  हलासन  ८) चक्रासन  ९)  उत्कटासन १०)  वृक्षासन।         

तो दोस्तों इस प्रकार से मैंने यह सूर्य नमस्कार और इन 10 आसनों का अभ्यास आरंभ किया आज 20 दिन हो गए हैं लगातार बहुत मजा आ रहा है I जो सब से  बड़ी सफलता मैंने हासिल की वह यह है कि मैं खुद को ऑर्गेनाइज करने में काफी सक्षम हो गया हूं मोबाइल की जो एक प्रकार कि ADDICTION थी वह खत्म हो रही है I मैं अपने हिसाब से जब चाहू , घंटो मोबाइल के बिना रह सकता हु  उसका इस्तेमाल करूं जब चाहूं ना करूं और कई घंटों तक एक घंटा दो घंटा मैं इसे हाथ भी नहीं लगाता बहुत सारे ऐसे कार्य जो मैंने छोड़ दिए है उन् मे मुख्यत:  चैटिंग I बिना वजह फ़ालतू  बातचीत करते रहना जिसका कोई मतलब नहीं I मैंने इन् सब कमजोरियों के ऊपर  अब पिछले 2 सप्ताह से इस पर विजय पा ली है । तीसरी कमजोरी यह थी कि मैं बड़ी आसानी  से किसी के द्वारा निरुत्साहित हो जाने लगा था I अब आपको निरुत्साहित कौन करता है इसका पता लगाना भी बहुत जरुरी है I कौन लोग होते है जो हमेशा एक दायरे अंदर सिमटे रहने को मजबूर करते है ? My Dear friends  वह कोई और नहीं आपके अपने बहुत खास लोग होते अपने दोस्त होते हैं या अपने सगे सम्बन्धी होते हैं होते है जो हमेशा आपके आस पास रहते है और उनकी नज़रो मैं  आप की वैल्यू बहुत कम हो गए हो गई होती है क्योंकि उनको आपकी

री बातें पता होती हैं आपकी नेचर पता होती है आपकी एक्टिविटीज पता होती हैं आपकी कमिटमेंट लेवल और फोकस लेवल पता होते हैं तो वह लोग आपको जरूर डी-मोटिवेट करते हैं चाहे वह अनजाने में करते हैं, लेकिन वे लोग अपने ही होते हैं अगर उनसे कोई आप बात करेंगे कि मैं अब यह काम करना चाहता हूं मुझे यह काम सीखना है या मुझे अब यह नया काम स्टार्ट करना है कुछ भी करना है तो वह जरूर कमेंट करेंगे कि नहीं नहीं आप से नहीं हो सकता आप तो बातें करते हो नहीं आप नहीं कर पाओगे, ऐसा कैसे हो सकता है यार आपके बस का काम नहीं है, यह सारी बातें, ऐसी ऐसी बातें  होती जो आपको अपनी मंजिल कि तरफ बढ़ने से रोक देती है I अपनी बात करू तो  इस कशमकश में पिछले 1 साल से कुछ भी नहीं कर पाया था और जब भी कोई काम आरंभ किया, मैं बहुत जल्दी उस काम को छोड़ देता था क्यूंकि  किसी न किसी दोस्त से पहले यह कमेंट आ जायेगा कि नहीं तुम से यह नहीं हो पायेगा और मैं खुद को संभाल नहीं पाता था और मेरे दिमाग मैं एक दम नेगेटिविटी आ जाती थी I  जब मेरे ऐसे अपने ही लोग ऐसा कमेंट करते थे कि  आप नहीं कर पाओगे, आप तो बातें ही करते हो, आप के बस का काम नहीं है I friends  मैंने क्या किया इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ? जरा सोचिये I  मैंने ऐसे उन लोगों से दूरियां बना ली और बस अब उन् से मतलब कि बात करता हु.I  कभी भी उनको अपनी योजना नहीं बताता हु I वो कहावत तो आप ने सुनी होगी ना कि अगर कोई अपना ही अंग भी अगर सड़ जाए तो उसे काट कर फेंकना पड़ता है  i   तो मैंने भी ऐसा ही किया क्यूंकि ऐसे लोगो से दूर रहना बहुत जरुरी हो जाता है  i  मैंने ऐसे अपने लोगो से खुद को दूर रखना शुरू किया और  आज मैं कामयाब हुआ हूं कि मैं उनके बिना उनसे बात किए बिना घंटों तक रह सकता हूं और अपने काम पर फोकस करता हूं ज्यादा अपने बारे में नहीं बताता हूं कि मैं क्या कर रहा हूं कैसे कर रहा हूं i

     

इसके अलावा मैंने  सभी एक्टिविटीज कि सूची तैयार की और उन् सबको टाइम देना शुरू कर दिया I मुझे बहुत सालों से शौक है कि मैं कुछ म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट  बजाना सीखू , कोशिश भी कई बार की लेकिन कुछ खास हो नहीं पाता था i हालांकि इसी वजह से मैंने कई सालो पहले गिटार और keyboard यानि पियानो भी खरीद कर रखे थे और सीखने की कोशिश भी करता रहा लेकिन कभी पूरी  एकाग्रता से  इस काम को अंजाम नहीं दे पाया था   लेकिन क्योंकि मेरे पास keyboard साथ था इस लिए  मैंने उस का अभ्यास YOUTUBE से lessons  ले कर शुरू किया   और क्यूंकि अलंकार तो मैंने  पहले से ही कर रखे थे , कुछ आसान  गानों की प्रैक्टिस शुरू कर दी जैसे मैंने शुरुआत मे ,”ओम जय जगदीश हरे” जो हमारी एक आरती है मैं उसको पूरा कंपलीट किया , दूसरा  गाना “बोल दो ना जरा” , तीसरा “माही वे” और  चौथा “यारा तेरी यारी को मैंने तो खुदा माना” i तो कहने का तात्पर्य यह है इन् १५-१६ दिनों में मैंने चार गाने सेख लिए और अब मेरा कॉन्फिडेंस लेवल भी अच्छा हो गया है

, मास्टर तो नहीं कह सकता लेकिन हां अच्छे प्रैक्टिस हो गई इतनी कि इन चार गानों को सीखने से बार-बार प्रेक्टिस करने से मुझे अब सुरो का बेसिक ज्ञान होना शुरू हो गया है और थोड़ा थोड़ा आईडिया हो गया कि कौन सी आवाज कहां निकलती है ।

 

चौथा जो सबसे महत्वपूर्ण काम पिछले 1 साल से दिमाग में था कि कभी टाइम मिलेगा तो मैं वेबसाइट डिजाइनिंग और  ग्राफिक डिजाइनिंग सीख लूंगा ये  बातें बहुत सारी मेरे मन में थी उसके बाद एक अपना यूट्यूब चैनल स्टार्ट करने की भी बहुत इच्छा थी i मे एक अपना ब्लॉग भी स्टार्ट करना चाहता था काफी समय से सोच रहा था इस विषय में भी I बहुत इच्छा थी ये  सारे काम करूं लेकिन बस ऐसे  दौड़ भाग में वक़त निकला जा रहा था और हो नहीं पाता था कुछ भी i   मेरे मन मे यह  कशमकश पिछले एक साल से चल रही थी और  इस प्रक्रिया मे मेरा काफी समय  वेस्ट हुआ लेकिन मैंने इस बार इतना फोकस किया इन् सभी डिफरेंट विषयो के  ऊपर और सबसे पहले GRAPHIC DESIGNING को सीखने की शुरुआत की और आरम्भ मे  THUMB -Nails की डिजाइनिंग सीखी, पिक्चर और  वीडियो को एडिट करना सीखा , Filmora नाम का एक वीडियो  एडिटिंग सॉफ्टवेयर purchase किया और छोटे छोटे वीडियो क्लिप्स को एडिट करना शुरू किया i   लगातार  प्रैक्टिस की और आज एक लेमैन से एक अच्छे  लेवल पर पहुंचा और आज इसे मैं   अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानता हूं i हाँ और इस उपलब्धि को मैंने हासिल किया पिछले 15 दिनों में बस  ।

   

यार अब आप बोलोगे कि यह बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है और क्या इतने कम् समय में ऐसा करना  पॉसिबल है  ?

लेकिन यह सच्ची बात है दोस्तों, मैंने खुद के ऊपर यह एक्सपेरिमेंट किया है बस अगर कुछ स्पेशल है इस मे तो वह है CONSISTENCY, यानि हर रोज उसी निर्धारित समय पर प्रैक्टिस करना , मोबाइल से दूर रहना और खुद को mentally  इतना स्ट्रांग बनाना की आप बस छोटी मोटी बातो को और खुद के mind को हैंडल कर सके. … और सच मे मैंने15 दिनों में अपने आप को एक सेटिस्फेक्शन लेवल तक पहुंचाया है जो बहुत टाइम से मैं सोचा करता था वह आज मैंने  इस लॉक डाउन के टाइम में  कर पाया हूं और खुद के  दिमाग को स्टेबलाइज कर पाया हूं i

मैं अभी घंटों तक किसी से बात न करके अपने काम के ऊपर फोकस कर सकता हूं और मुझे कोई डिस्टर्ब नहीं कर सकता  है i  कोई मुझे कॉल करें, कोई मैसेज करें मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अब i  जरा अपने बारे चिंतन कीजिये की आज आप भले ही कितना इम्पोर्टेन्ट काम कर रहे हो लेकिन जब कोई मैसेज या कॉल के लिए मोबाइल की घंटी बजती है तो आप कितनी देर तक खुद को रोक पाते हो ? नहीं रोक पाते न i मान लीजिये इस बात को , आपका ध्यान भटक जाता है  और आप जितनी जल्दी हो सके अपने मोबाइल को चेक करना चाहोगे i लेकिन मैंने तो अपनी commitment and dedication से यह बहुत कठिन कार्य करके देख लिया i

मेरी इस बात पर यकीन कीजिए कि अगर हम खुद से कमिटमेंट करके अपनी habits मे बदलाव   ला सकते है और अपने आप को पूरी तरह एक अलग खुद का बदला हुआ स्वरुप पेश कर सकते है I इस तरह से अभ्यास करके मैंने खुद में बहुत बदलाव लाया और आज मई कह सकता हु की मई अब एक बदला हुआ इंसान हु वह पुराना वाला मेरा version अब बदल कर नए वर्शन मे तब्दील हो चूका है I

मे सच कहता हु की मेरे लिए २१ दिनों का लॉक डाउन बहुत ही सुखदायी और फायदे मंद रहा और मैं मेरे जीवन में बहुत सारे permanent बदलाव ला पाने मे सफल रहा हु I लॉक डाउन के दौरान   मेरी पर्सनैलिटी में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हो गए जो अब मैं हमेशा आगे आने वाले जीवन में मेरे साथ रहेंगे और अभी मेरी इन् सभी नए आयामों का अभ्यास जारी रखूँगा I

जिस प्रकार से मैंने आपको अपने साथ घाटी हुयी घटनाओ का विस्तार से विवरण दिया इसी प्रकार से आने वाले लॉक डाउन के समय मे खुद को बदलने की कोशिश कर सकते हो….

सोचो समझो और अपने कीमती समय का सही उपयोग करो i

प्यारे दोस्तों, अभी भी वक़त है , अपना लॉक डाउन का वक़त प्लान कर लीजिये I यदि आप २१ दिन वाले लॉक डाउन मे कुछ नहीं कर पाए है तो अब भी वक़त लॉक डाउन के इस दूसरे को प्लान कर लीजिये ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ा है i जो व्यक्ति अभी भी इस समय की कीमत को नहीं समझ पाए और केवल दूर के messages को यहाँ से वह करते रहे या सारा दिन व्हाट्सप्प या फेसबुक  पर  गप्पे मारते रहे और जीवन के इस सुनहरे दौर का आनंद और पूरा फायदा नहीं उठा पाए , आओ आगे बढ़ो और सोचो की आप क्या नया कुछ कर सकते है इस लॉक डाउन मे ? आपका passion क्या है ? पहचानो खुद के जूनून को और ले लो एक सूंदर सपना उस जूनून को पूरा करने का और  लग जाओ उस को साकार रूप देने मे i

कुछ लोग तो बस कोरोना के डर को फैला कर और यह फ़ालतू के सन्देश कि उस कंट्री मे या स्टेट मे इतने लोग मर गए , उतने लोग पॉजिटिव टेस्टेड पाए गए , नकारातमक ऊर्जा के लेन देन मे लगे हुए है i इस नकारात्मकता के लेन देन मे जहा वह खुद मे नकारात्मकता भर रहे होते है वही वह दूसरे लोगो को भी नकारातमकता से जॉब कर एक असमंजस की सिथति पैदा कर रहे है और दर का मोहोल बन रहा है  i दोस्तों ऐसा कुछ नहीं होने वाला है कोरोनावायरस है और अपने अपना टाइम लेकर के यह खत्म हो जाएगा और जो हमारी सरकार समय समय पर निर्देश दे रही है कि social distancing और अन्य उपाए अपनाये जाए , हमें तो आँखे बंद करके बस उनका पालन करना है i बाकी इस से ज्यादा नहीं उलझना है , आपको सिर्फ इतना ही बताया गया है और आपकी बहुत कृपा होगी अगर आप इतनी बात मान कर अपने खुद के ऊपर काम करना आरम्भ कर दे i  बहुत जल्दी भारतवर्ष एक सशक्त  लीडर के रूप में इस क्षेत्र में पूरे विश्व के सामने उभर कर आएगा  क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री जी स्वयं में एक महान पुरुष है और  मैं समझता हू कि उनके नेतृत्व में हम सभी लोग सुरक्षित हैं i

 बस आप इस कीमती समय को ऐसे बर्बाद ना कीजिए और जैसे  मैंने अपने ऊपर विभिन्न प्रकार के प्रयोग , जो मैंने ऊपर विस्तार से लिखे है,  करके खुद को बदल पाया हूं तो आप भी इस दिशा में कोई एक चीज तो कीजिए आने वाले 15 डेज आज से शुरू हो गया 15 दिन का सफर तो 15 दिनों में कुछ तो नया काम कीजिए, प्रैक्टिस कीजिए और खुद के व्यक्तित्व  में शामिल कीजिए I अपने आर्टिकल के माध्यम से मेरी जो अपनी पर्सनल लाइफ के अनुभव  हैं आपसे कैसे हम मेंटली स्ट्रांग बने कैसे हम अपनी सोच में बदलाव ला करके  पूरा जीवन बदल सकते हैं , विचार आपसे शेयर करता रहूंगा i

Thanks to you all

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